राष्ट्रीय पर्व यानी मतदान दिन पत्रकारीता की हकीकत
भारत एक संस्कृति प्रधान देश है यहा रहने वाले हर लोगो जाति पाती के भेदभाव के भुलाकर एक दुसरे का त्यौहार खूब खुशी और उल्लास से मनाते है लेकिन एक दिन ऐसा भी है जिसे लोग और भी खुशी और उल्लाश से मनाते है उसका नाम है मतदान क्षेत्रीए मुद्दो पर लडा जाने वाला विधानसभा चुनाव 2013 मे रिर्कोड तोड मतदान हुआ और स्थानिक लोगो ने साबित कर दिया की अब लोग जातिय राजनिती से उपर उठकर विकास के मुद्दो को ज्यादा ध्यान देते है और जिन लोगो ने हमारे विश्वास के साथ विश्वास घात किया है उन्हे हम अब सिरे से नकार सकते है और यह बात चुनावो के नतीजे से साबित भी हो गया
,,,इस दिन को कवर करने के लिए हर चैनल वाले पहले से ही खूब सारी तैयारिया भी करते है और सुबह 6 बजे से रिर्पोटर लग जाते है लाइव और नए नए अपडेट के लिए लेकिन वह रात कैसी होती है उसके बारे मे लोग कम ही जानते है और जो जानते भी है वह अपने आपमे मे इतने मशगूल होते है कि उन्हे दूसरे के बारे मे सोचने का मौका ही नही मिलता हम बात कर रहे है कैमरामैनो की जब सुबह लोग उठते ही टीवी के सामने नजरे जमाकर बैठ जाते है और रंग बिरंगे रिर्पोटर नए नए अपडेट के साथ लोगो को नई नई जानकारिया मुहैया कराते है तब किसी ने यह सोचने का कष्ट भी नही किया होगा की रिर्पोटर को इस जगह तक पहुचाने के लिए टेक्निकल के बंदो ने अपने रातो की नींद को हराम किया है कुछ ऐसा ही हुआ जानो दुनिया न्यूज चैनल मे जहा मे इस वक्त अपने भरण पोषण के लिए नौकरी करता हू वहा भी हमे एक दिन पहले से आगाह कर दिया गया की मतगणा के दिन सभी को सुबह जल्दी आना है आफिस के साहबो की बात सर आखो पर हम सुबह 7 बजे आ गये और लाइव का खेल शुरु हो गया किसी ने दिल्ली का तो किसी ने छत्तीसगढ का अपडेट दिया किसी ने शिवराज के जीत पर जशन के माहौल की जमकर तारीफ की तो किसी ने राजस्थान के रानी के हाथ मे फिर से राजस्थान की बाग दौड देने की बात कही,,, इन सब के बीच लोगो ने तारीफे भी हांसिल की औऱ रिर्पोटरो का चौतरफा तारीफ के पुलिंदे बाधे गए ,,,
लेकिन मुझे हैरानी तब हुई की पूरी रात जगकर मेहनत करने वाले कैमरामैन संदीप मीणा की किसी ने किसी प्रकार की तारीफ नही की धीरे धीरे दिन ढलता गया औऱ दोपहर सर पर आ गई लोगो को शिद्दत से भूख सता रही थी ,,,लोग नीचे उतरे और आफिस के भोजन का भरपूर लाभ उठाया लेकिन किसी ने यह पूछना तक मुनासिब नही समझा की कैमरामैन ने खाना खाया की नही हमने उससे कहा की खाना क्यो नही खाया तो मासूम सा जवाब कि आप अकेले थे हमारे पास कैमरा था जिसे अकेला छोडकर हम नही जा सकते यह एक कैमरामैन की हकीकत थी ,,,और यह कोई एक दिन की नही बल्कि हर दिन की हकीकत है और लोगो इसे अपनी किस्मत समझ कर सह लेते है एक घटना का जिक्र करने से दिल नही मानता नौकरी के दौरान हमे बीट दी जाती है
हमे ऐसी बीट दी गई थी जिसकी जरुरत हर आम से लेकर खास को होता है हमारे यहा के कैमरामैन शादी सुदा है और अपनी बीबी से हर दिन डींग हाकते है कि मे पत्रकार हू ,,,घर की पारिवारिक स्थिती ज्यादा अच्छी नही थी एक दिन बीबी ने फरमाईस कर दी की सरकारी आवास मे खुद का घर चाहिए और हम बडे उत्साह से बोल बैठे पगली बस इतनी सी बात है हमे तो सभी जानते है देख कल का कल ही सरकारी आवास का फार्म भर देता हू लम्बी और बोझिल रात के बाद सुबह उठकर तैयार हुआ और पहुच गया सरकारी दफ्तर मे लम्बी लाइनो को देख कर अन्दर की पत्रकारीता जाग गई और साहब से मिलने चल पडे साहब ने बताया हम नही इन लाइनो से बचने के लिए आपको बडे साहब से मिलना पडेगा
जब बडे साहब के पास पहुचे तो देखकर खुशी आशमाने के उचाईयो पर पहुच गयी यह वही साहाब थे जिनकी हर दिन हम बाइट लेते थे उनसे मिला और बात की तो उन्होने पहचानने से साफ इंकार कर दिया और कहा आप कौन है आपको हम नही जानते यह बात सुनकर किसी शायर की ये पंक्तिया याद आ गई
मिलता है शुकू दिल को उस यार के कूचे मे
मगर आज बडे बैआबरु होकर हम निकले
रास्ते मे चलता रहा और सोचता रहा हमे आज तक क्या मिला अंत मे घर आ गया जहा बीबी खुब खुशी से इंतजार कर रही थी ,,पहुचते ही सवाल दाग दिया क्या हुआ काम बना की नही ये सुनकर मे हक्का बक्का हो गया और पत्नी से सारी बात सिलसिले वार बता दी बीबी ने मुस्कुराते हुए अपने आगोश मे पनाह दिया और घर मे ले गई प्यार से खाना खिलाकर आफिस जाने को कहा तब समझ मे आया की हमारी सबसे किमती जेवर तो हमारे पास ही थी और हम उसे ढूढने के लिए दर दर भटकते रहे उसी दिन से मै अपनी जिंदगी से खुश हो गया और समझ गया की हम तो एक शिल्पी है
हम तो एक गुमनाम सिपाही है जिसकी इतनी ही किमत है कि एक पत्थर को तराश कर हीरा बना दे और जब उस हीरे की चौतरफ तारीफ हो तो वह इतना भी न सोचे की मुझे यह रुप देने वाला शिल्पी यही मौजूद है उसका लोगो के परिचय करवा दिया जाए
हम तो गुमनाम सिपाही है सियासत के गलियारो के
हमसे लोग मिलना भी गवारा नही समझते
डरते डरते डरते हाथ बढाते लोगो के सामने
लोग हाथ मिलाना भी गवारा नही समझते ( आरिफ आलम ,,,,अश्क )